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क्या मानव जीवन पूर्णतः सुख है।

जेर्मी बेंथम : क्या मानव जीवन पूर्णतः सुख है? (उपयोगितावाद) इस पृथ्वी पर जब से मानवजाति की उत्पत्ति हुई उसका सभी प्रयास सुख प्राप्ति के लिए हुआ है। ना केवल मानव बल्कि पशु पक्षियों में भी यह प्रवृत्ति है। मानव की चार मूलभूत आवश्यकताएं है - भूख, प्यास, नींद व सेक्स। इन आवश्यकताओं मे वह सर्वोत्तम की आकांक्षा रखता है यही सुख की कामना है। बेंथम ने सुख पर विस्तार से लिखा है। बेंथम का जन्म रक्तहीन क्रांति के बाद लंदन मे 18 वीं शताब्दी मे हुआ वह बचपन से ही उच्च प्रतिभा के थे। बेंथम को उपयोगितावाद का जनक माना जाता है हालांकि उपयोगिता शब्द का प्रयोग सबसे पहले ह्यूम ने किया था। मानव का जीवन उपयोगिता पर आधारित है वह देखता है कौन क्या उपयोग कर रहा है फिर वह भी करता है। जब मानव का किसी भी कार्य को वांछनीय या अवांछनीय समझने का मापदंड यह हो कि उस कार्य मे सुख उत्पन्न करने की कितनी क्षमता है। बेंथम, जेम्स मिल, जान स्टुअर्ट मिल आदि उपयोगितावादी विचारक मानते है कि समस्त मनुष्य सुख चाहते है और यही उसका पहला लक्ष्य है। बेंथम का मानना है कि मानव को वे सभी कार्य करने चाहिए जिससे उसे एन्द्रिय सुख की प्राप्त...