स्वयं में समाधान की तलाश - 2
कौतूहल, समस्याएं और परेशानियां बाहर नहीं भीतर है। सुख और दुख की विभिन्न धाराएं अंदर से निकलकर बहिर्जगत में अपना प्रभाव डालती हुई दिखती हैं किंतु उनका उत्पन्न होना, समाप्त होना और उन पर नियंत्रण स्थापित करना; अंदर से सम्भव है। मनुष्य के मस्तिष्क में उत्पन्न एक भावनात्मक विचार, उसके सम्पूर्ण शरीर पर नियंत्रण स्थापित कर उन्हीं के अनुरूप प्रतिक्रियाओं को पैदा करती है। और प्रत्येक विचार संसार के प्रत्येक वस्तुनिष्ठ और आत्मनिष्ठ विषयों के प्रति विभेदीकृत दृष्टिकोण प्रदान कर देती है। उदाहरण के लिए, नये नये प्रेम में पड़कर नायक और नायिका के जीवन में अद्भुत परिवर्तन आता है। वे समस्त संसार को दया और करुणा के भाव से परखने लगते हैं। अक्सर प्रेमी के वेशभूषा, बोली और व्यवहार में परिवर्तन दिखता है, उन स्थानों पर जहां उसकी प्रेमिका के दिख जाने की संभावना अधिक है; वहां वह एक अलग ही मनुष्य बनकर प्रकट हो जाता है। मानव इतिहास का सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कैसे मानसिक शांति पाई जाए? कैसे कैवल्य और मोक्ष की प्राप्ति हो? महात्मा बुद्ध ने मध्यम मार्ग को इसका हल बताया, महावीर स्वामी तथा उनके पूर्ववर्ती तीर्थ...