मानव में मनुष्यता की खोज
हम सब के भीतर एक खूंखार जानवर होता हैं, जिसको हाब्स ने लेवियाथन कहा हैं। जब पृथ्वी की उत्पत्ति हुई और आदिमानवों का धरती पर पदार्पण हुआ तो उनका जीवन यायावर और खानाबदोश प्रकार का था। प्रमुख सामाजिक समझौता सिद्धांत के विचारकों का मानना है कि उनके भीतर केवल एक भयानक और खूंखार जानवर रहता था जो कि प्रत्यक्ष रुप से दिखता था । यह मनुष्य तब मनुष्य नहीं था बल्कि आदिमानव था। हमने आदिमानव से मानव और फिर मनुष्य होने में लाखों वर्षों का लम्बा सफर तय किया हैं। तब का मानव जंगली जानवरों का शिकार करने, पेट भरने जैसी भावना थी किंतु सामूहिक जिम्मेदारी वाली भावना नहीं थी । जब सभ्यता और संस्कृति अपने अपने काल के उच्च स्थिति में होते हैं तब मानव के भीतर मनुष्यता पनपती हैं। अबतक के मानवों का इतिहास वर्ग संघर्ष और सामाजिक परिवर्तनों का इतिहास है । आदिकाल से लेकर आजतक समाज में विभिन्न परिवर्तन हुए जिसके परिणामस्वरूप मनुष्यों में सकारात्मक गुणों का परिवर्तन हुए। आधुनिक मनुष्य सबसे ज्यादा सुखी मनुष्य हैं और अपने उन्नति के शिखरों पर स्थित हैं किंतु ऐसा हरकाल में हमें प्रतीत होता आया हैं। मनुष्यों ने अपने कामों से ...