बेघास की उजली जमीन ।
कभी कभी मैं बहती धारा के विलोम में चलने का प्रयास करता हूं। उन धाराओं को अपनी बांहों में जकड़कर, मैं उन्हें पूरा तोड़ देना चाहता हूं। मैं स्वयं को भी तोड़ता हूं - एक सीमा से ज्यादा तोड़ता हूं और मैं उस राक्षस को असहाय अवस्था में देखना चाहता हूं। मैं अक्सर उन लोगों से बचने का प्रयास करता हूं, उनकी बातों पर यकीन करने से बचता हूं - जो जीवन को ऊपरी तौर पर जीना जानते हैं। जीवन को गहराई में जीना और महसूस करना किसी त्रासदी से कम नहीं है। उसके वायदों, उसके कसमों पर मुझे कभी भरोसा नहीं हुआ और शुरू में अंत जानते हुए - मैंने अंत किसी दूसरी दिशा में करने का प्रयास किया लेकिन अंत वैसा ही हुआ जैसा मैंने सोचा था, जैसा मुझे आरम्भ में पता था। मैं उसे देखता हूं - उसकी झुठी हंसी और मुस्कुराहटों में सिमटा हुआ दर्द; मैं महसूस करता हूं। उसका मुझे यूं दिखाना कि मैं तुम्हारे बगैर भी खुश हूं - इस बात का परिचायक है कि कितने दुःखों से वह छटपटा रही है। जी चाहता है, उस थकी हारी, पारजिता को - बांहों में भरकर, उसके माथे को चूम कर - यह कह दूं कि नहीं तुम अकेली नहीं हो, मैं हूं तुम्हारे साथ। मुझे पता है, उसने अपन...