दुनिया किसी के प्यार में।
उसकी पलकें जब जब मेरी तरफ उठती, मेरे ह्रदय में एकसाथ हजारों गुलाब खिल जाते। उसकी आंखों की खुबसूरती, उसमें समाया अपनापन, कमल से सुर्ख लाल उसके ओंठ - मुझे अपनी तरफ किसी तीव्र चुम्बकीय क्षेत्र धारण करने वाले चुम्बक की तरह अपनी ओर आकर्षित करतीं। आकांक्षा यही होती कि, जीवन कुछ पल के लिए ठहर जायें, कुछ पल के लिए मैं उसका हो जाऊं और कुछ पल में जीवन उसकी बांहों में उमड़कर, घुमड़कर समाप्त हो जाएं। प्रेम की पुनरावृत्ति इतनी तीव्र शक्ति के साथ मुझ पर होगी इसका मुझे कोई अंदाजा नहीं था - उससे मिलकर ऐसा लगा मानो जैसे वह अपने भीतर प्रेम को महासागर की तरह विशाल और आकाश की अनन्त श्रृंखलाओं में भरकर, मुझे उसमें डुबो दें रही थी। उससे मिलने की तड़प, उसे देखने की लालसा, उसे सुनने और उसके साथ कुछ पल बिताने की इच्छाएं मेरे भीतर बहुत तीव्रता से उठतीं, तड़पती और सागर की लहरों की तरह असफल प्रयासों के बाद मचलकर, घूंट के आंसू पीकर अशांत हो जातीं। मेरी नजरें उसे इतनी तड़प के साथ यहां वहां खोजती कि जैसे मरूस्थल में कोई प्यासा पथिक जल की तलाश में उन मरीचिकाओं का पीछा करते हुए थक और हारकर बैठ जाता है क्योंकि वहा जल ह...