भावनात्मक बुद्धिमता - 1
मनुष्य भावनाओं का दास है। जीवन दो प्रमुख मिश्रणों से चलायमान होता है - आदर्शवादी विसंगतियों और यथार्थवादी संगतियों से। जिस प्रकार से अलंकार शरीर के सौंदर्य में अभिवृद्धि करता है; उसी प्रकार से मनोभाव मस्तिष्क को शीतलता, सौंदर्य और पीड़ा का अहसास कराते हैं। हमारे निर्णय इनसे प्रभावित होते हैं। मनोभाव या भावनाएं मनुष्य की चित्तवृत्तियों में प्रवेश कर सुख और दुख का आभास कराती हैं, जो क्रमशः सकारात्मक और नकारात्मक चित्तवृत्तियों के उद्वेलित होने से होता है। ईर्ष्या, घृणा, नफ़रत, द्वेष, क्रोध, लालच, मोह, लोभ इत्यादि नकारात्मक मनोभावों को तथा प्रेम, करूणा, दया, ममता, करूणा, परोपकार इत्यादि सकारात्मक मनोभाव हैं। मस्तिष्क एक जटिल अवस्था है - ज्यादातर मनुष्य इसके पृष्ठ पर ही हिचकोले खाते रहते हैं। भावनाओं का 360 डिग्री अवलोकन आवश्यक है जिसमें बुद्धिमत्ता का प्रयोग करके इसको समझा जा सकता है। आइए, इस जटिलता को सरलता में परिवर्तित करें । जीवन में एक समय पर एक ही विकल्प पर जाया जा सकता है। संकल्प की स्वतंत्रता - हमें बताती है कि मनुष्य अपने कार्यों के लिए स्वयं जिम्मेदार है तथा सम्पूर्ण नैतिक व्यवस...