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Showing posts from March, 2023

मानव की जय यात्रा

मानव की जय यात्रा  हमने आपने सबने जब जन्म लिया था तब आज जैसे नही थे।आदिमानव भी वैसे न थे जैसे कि आज वे है, यह उसकी युगो युगो की जय यात्रा के सुफल है। क्या आपने देवदारू के दीर्घकाय वृक्ष को देखा है? वह जड शक्ति के दुर्वार आकर्षण - महाकर्षण को पराभूत करते हुए निरन्तर उर्ध्वगामी बनकर उन्मुक्त व्योममंडल मे विहार करता है और पाषाण की कठोर छाती भेदकर अज्ञात पाताल से अपना रस खीचता रहता है। विशिष्टता यह है कि वह अपने स्थान पर दृढता से खडा रहता है। वास्तविक मनुष्य वही है जो पशु धरातल से पाशविक गुणो से ऊपर उठा हो। मनुष्य व पशु मे आदिम सहजात अनेक प्रवृत्तियां प्रबल है - आहार, निद्रा, भय, मैथुन आदि लेकिन मनुष्य फिर भी मनुष्य है। क्योंकि वह दूसरो के लिए अपना सर्वस्व उत्सर्ग कर सकता है उसमे त्याग है, संयम है, दया है, धैर्य है, श्रद्धा है और सबसे बडी गुण है- विवेकशक्ति बुद्धि और संकल्पशक्ति। विलियम जेम्स लिखते है कि "विवेकहीनता के क्षणो मे जब मनुष्य का पशुत्व प्रबल हो जाता है तब वह पशु से भी बुरा होता है और ऐसा भयानक जन्तु बन जाता है जो व्यवस्थित ढंग से अपने ही जाति के जन्तुओ का शिकार करता है।...

क्या चिंता चिता के समान होती है?

मानव जीवन का गम्भीरता से अध्ययन से करे तो यह सत्य सहजता से मुखर होता है कि इस दुनिया मे मानव का चिंताओ से रिश्ता धरती पर सभ्यता के विकास सरीखा ही प्राचीन और सनातन है। चिंताए खुले आकाश की तरह अनन्त और गहरे सागर की तरह अगाध होती है इनकी अपनी प्रकृति व अभाव होते है, कुछ चिंताओ से जीवन की दिशा अवरूद्ध हो जाती है तो कुछ चिंताएं आश्चर्यजनक रूप से उत्प्रेक का कार्य करती है। चिंताए जीवन के साथ चलती है और ये जीवन के साथ ही खत्म होती है, यही कारण है कि चिंतारहित जीवन की सम्भावना महज कल्पना है क्योंकि चिंताओ पर चिंतन यही खत्म नही हो जाता है। प्रसिध्द ब्रिटिश राजनीतिज्ञ विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि 'जब भी कभी मै अपने जीवन के चिंताओ के बारे मे पीछे लौटकर देखता हूं तो मुझे उस बूढ़े व्यक्ति की कहानी याद आ जाती है जिसने अपनी मृत्युशैया पर कहा था वह ताउम्र बेशुमार चिंताओ और भय से परेशान रहा, लेकिन उनमे से अधिकांश चिंताएँ कभी भी घटित नही हुई है।' आशय यह है कि हम चिंताओ से मुह नही मोड सकते लेकिन उनके बोझ तले खुद के जीवन को अव्यवस्थित होने से तो बचा सकते है। वास्तविकता यह है कि चिंता मे ही मानव का ...

बौद्ध नैतिक दर्शन

आचरण की शुद्धि तथा दुख से मुक्ति के लिए गौतम बुद्ध ने मनुष्य को जिस मार्ग का अनुसरण करने की शिक्षा दी है उसे अष्टांग मार्ग कहते है। इस मार्ग का वर्णन उन्होंने चार आर्यसत्यों के माध्यम से किया है। प्रथम आर्य सत्य ये है कि सभी प्राणियों का जीवन दुखमय है। जन्म, वृद्धावस्था, रोग, मृत्यु, इच्छित वस्तु की प्राप्ति ना हो पाना, प्राप्त सुख का नष्ट हो जाना, अप्रिय वस्तुओं व प्रिय वस्तुओं से वियोग आदि सभी दुखपूर्ण है। समस्त प्राणियों को दुख हमेशा घेरे रहते है। इस प्रकार संसार मे दुख की व्यापकता निर्विवाद है। दूसरा सत्य यह है कि यह व्यापक दुख अकारण नही है इसका कारण अवश्य है। महात्मा बुद्ध ने दुख के कारणों की 12 श्रृंखलाएं बताई जिनमें अविद्या को इसका प्रथम और मूल कारण बताया है।बौद्ध दार्शनिकों के अनुसार, अविद्या का अर्थ है आत्मा के स्वरूप और चार आर्य सत्यों को ठीक से ना जानना। तीसरा आर्यसत्य यह है कि दुख का निरोध अथवा विनाश सम्भव है। बुद्ध यह मानते थे कि मनुष्य दुख से तो मुक्ति प्राप्त कर सकता है। यदि दुख के समस्त कारणों को समझकर उनका निराकरण कर दिया जाय तो वह स्वतः नष्ट हो जाएगा। अन्य सभी वस्तुओं...

स्वतंत्रता और समानता एक दूसरे के पूरक है।

स्वतंत्रता और समानता के बीच का संबंध जटिल है क्योंकि इसके लिए कुछ लोग हैं जिन्होंने समय की शुरुआत से संघर्ष किया है और आज तक संघर्षरत है। ये दो शब्द दृढ़ता से जुड़े हुए हैं, हालांकि अविभाज्य नहीं हैं समानता का सरल अर्थ है। यह गुणवत्ता, शक्ति, स्थिति या डिग्री में समानता या समानता है। सरल शब्दों में, यह अन्य लोगों के समान ही है। स्वतंत्रता नियंत्रित या सीमित होने के बावजूद कार्य करने और सोचने में सक्षम होने की स्थिति है। इन दोनों के बीच संबंध स्वतंत्रता प्राप्त करने से पहले शुरू होता है। स्वतंत्रता के बिना, किसी के पास दूसरों के बराबर होने की क्षमता नहीं है, क्योंकि वह वह नहीं कर सकता जो वह चाहता है। टोकेविले ने कहा कि "जब तक मनुष्य पूरी तरह से स्वतन्त्र नहीं हो जाते, वे बिल्कुल समान नहीं हो सकते।" जो स्वतंत्र नहीं है उसके पास एक मालिक है जो उसके लिए अपनी पसंद के हिसाब से नियम कानून बनाता है। अपने आप को स्वामी से छुटकारा दिलाने और राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल करने का एकमात्र तरीका शासन के खिलाफ सफलतापूर्वक विद्रोह करना है। इस विद्रोह के साथ, सभी लोगों के पास अब कार्य करने का अवसर...