अंधकार से अंधकार की ओर।
हम सबका जीवन अंधकार में है। हम हर पल अंधेरे में और अज्ञानता में जी रहे होते हैं। हमारे ज्ञान का, हमारे सोचने, समझने और अभिव्यक्ति करने की एक सीमा होती है और इसी सीमा में बंधकर हम दूसरे लोगों से व्यवहार करते हैं - जिसका परिणाम अच्छा तो कभी कभी बहुत अच्छा बनकर सामने आता है। हमारे सीमा से ऊपर उनकी सीमा होती है जिनका ज्ञान हमसे ज्यादा होता है परन्तु जैसे ही हम ऐसे ज्ञान के प्रकाश से आलोकित होते हैं तो हमारा अहंकार आकर बीच में खड़ा हो जाता है और दुबारा से हम अंधकार में बंधकर रह जाते हैं। इन पलों में आवश्यक होता है कि हम विनम्र बनें और अपने विवेक से ऐसे सभी लोगों का सम्मान करते हुए उनके ज्ञान से अपने ज्ञान की सीमा को बढ़ाने का हर संभव प्रयास करें। किसी के अनुभवों से सीखना और उससे प्राप्त शिक्षाओं को जीवन में आत्मार्पित करना - हमें वास्तविक सुखों की अनुभूति कराएगी लेकिन यह सीखना हमें फिर अंधकार में ले जाएगी क्योंकि ज्ञान की दूसरी सीमा को तोड़ना, हमारे लिए चुनौती होगी और इस प्रक्रिया में प्रकाश के पल केवल भ्रम है। जीवन में कभी भी वह एक सीधी रेखा नहीं आएगी जब सबकुछ सही चल रहा हो और आप उस र...