संकल्प की शक्ति - Solemn Vow
अक्सर बागीचे में टहलते हुए - यह देखकर हैरानी होती है कि अलग अलग पौधों में अलग अलग रंगों के फूल व फल आये हैं। सारा आकाश, सूर्य, ब्राह्मड की अनन्त तरंगों, हवाओं, जल का वाष्पीकृत रूप आदि छोड़कर उस छोटे से बीज की संकल्प शक्ति इतनी ज्यादा है कि वह अपने इच्छानुसार धरती से अपने पसंद का रंग व स्वभाव चुन लेता है। हर बीज की अपनी इच्छा हैं - गुलाब गुलाब बन जाता है और चमेली चमेली बन जाता है; एक ही मिट्टी में से दोनों अपनी ऊर्जा व पोषण प्राप्त करते हैं। जिंदगी में अनन्त सम्भावनाएं हैं और उन सम्भावनाओं में से हम वहीं चुन लेते हैं जो हम चुनना चाहते हैं। हमारे आस पास अनन्त विचारों का प्रवाह है और हम उन्हीं विचारों को अपने पास ले आते हैं जो हम लाना चाहते हैं। इसी दुनिया में कोई जीसस, कोई बुद्ध तो कोई कृष्ण बन जाता है और हम कुछ भी नहीं बन पाते हैं और कुछ ना बनकर ही मिट जाते हैं। और जिस दुनिया से ऊर्जाएं खींची जाती है - वह आसमान, तारे, सूर्य, हवाएं सब एक हैं फिर इसी दुनिया में लोग अलग अलग क्यों हो जाते हैं? आखिर आदमी के व्यक्तित्व अलग अलग क्यों हो जाते हैं? मनुष्य के शरीर में सात केंद्र है और इसी के...