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जीवन का ऊहापोह

हम सपने देखते हैं, आह कितना मनोहर और आह्लादित दृश्य होता है और आंख खुलते ही, हमारा भ्रम टूट जाता है कि यह एक स्वप्न था। और उस सपने में जो कुछ भी हम खुबसूरत और भयानक चीजें देखते हैं - अगले ही पल वह समाप्त हो जाता है और उनके समाप्त होने का हमें कोई दुख नहीं होता है। संसार एक भ्रम है, एक ऐसा भ्रम जो हमें सत्य प्रतीत होता हुआ नजर आता है। लेकिन ऐसा नहीं है, प्रकाश की किरणें किसी वस्तु पर आपतित होकर हमारी आंखों तक परावर्तित होती है और तब कोई वस्तु हमें नजर आती है। अंधेरे में आपका वहीं कमरा आपको अच्छा नहीं लगता है और प्रकाश में खुबसूरत और बेहतर। यह है - अच्छे और बूरे का संगमरूपी परिदृश्य और उसमें समाया वह भ्रम जो हमें नजर नहीं आता है। क्या इस बात की सम्भावना नजर नहीं आती है कि यह सम्पूर्ण जीवन ही हमारे लिए सपना हो, एक लम्बा सपना हो जो हम कहीं सोकर देख रहे हो और जब दशकों बाद हमारी आंखें खुले तो हम एक अलग संसार में, अपनी आंखें खोलें। पूरा जीवन हम उन तितलियों को पकड़ने के लिए दौड़ लगाते हैं जो हम कभी नहीं पकड़ पाते हैं। इस भ्रम को गाढ़ा करने में भावनाएं एक अहम हिस्सा निभाती है - जो जीवन को इतना ...

विचारों की श्रृंखला में हम।

हमारा सम्पूर्ण जीवन विचारों से संचालित होता है और जैसा आप सोचते हैं वैसे ही बन जाते हैं और आपका सोचना ही विचारों को पैदा करता है। किसी भी प्रकार के विचार आप पर थोपे नहीं जा सकते हैं अथवा बलपूर्वक आपपर आरोपित नहीं किया जा सकता है। आपका संज्ञान उसे सोच समझकर स्वयं में आत्मार्पित करता है। आपका संज्ञान वह मानक स्तर है जिसका निर्माण लगभग प्रत्येक क्षण होता रहता है और इसी के आधार पर आप अच्छे और बूरे विचारों का चुनाव करते है और उसे स्वयं को प्रभावित करने देते हैं। परन्तु आपके संज्ञान की भी एक सीमा है ; संज्ञान का निर्माण आपके अबतक प्राप्त शिक्षा, संस्कार, सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों तथा सभी प्रकार के आगत और निर्गत सूचनाओं से होता है। तो अगली बार कोई आपसे यह कहता हुआ मिले कि मैं शाकाहारी हूं और सभी लोगों को शाकाहारी हो जाना चाहिए अथवा मैं अपने धर्म को पसंद करता हूं और दूसरे धर्मों को नहीं तो दरअसल वह अपनी सीमा को आपसे बता रहा होता है। उसके संज्ञान की सीमा वहीं हैं, उसके सामाजिक परिवेश में यही सीख उसे दी गई है और उसमें कुछ भी मौलिक विचार नहीं है। कोई भी विचार बूरा नहीं होता है, वह अच्छा और अध...