जीवन का ऊहापोह

हम सपने देखते हैं, आह कितना मनोहर और आह्लादित दृश्य होता है और आंख खुलते ही, हमारा भ्रम टूट जाता है कि यह एक स्वप्न था। और उस सपने में जो कुछ भी हम खुबसूरत और भयानक चीजें देखते हैं - अगले ही पल वह समाप्त हो जाता है और उनके समाप्त होने का हमें कोई दुख नहीं होता है। संसार एक भ्रम है, एक ऐसा भ्रम जो हमें सत्य प्रतीत होता हुआ नजर आता है। लेकिन ऐसा नहीं है, प्रकाश की किरणें किसी वस्तु पर आपतित होकर हमारी आंखों तक परावर्तित होती है और तब कोई वस्तु हमें नजर आती है। अंधेरे में आपका वहीं कमरा आपको अच्छा नहीं लगता है और प्रकाश में खुबसूरत और बेहतर। यह है - अच्छे और बूरे का संगमरूपी परिदृश्य और उसमें समाया वह भ्रम जो हमें नजर नहीं आता है। क्या इस बात की सम्भावना नजर नहीं आती है कि यह सम्पूर्ण जीवन ही हमारे लिए सपना हो, एक लम्बा सपना हो जो हम कहीं सोकर देख रहे हो और जब दशकों बाद हमारी आंखें खुले तो हम एक अलग संसार में, अपनी आंखें खोलें। पूरा जीवन हम उन तितलियों को पकड़ने के लिए दौड़ लगाते हैं जो हम कभी नहीं पकड़ पाते हैं। इस भ्रम को गाढ़ा करने में भावनाएं एक अहम हिस्सा निभाती है - जो जीवन को इतना अधिक परिमार्जित कर देते हैं कि हम सबकुछ सत्य होता हुआ प्रतीत होता है। यह संसार अस्थाई है, यहां सब कुछ अस्थाई है जिसका अर्थ है कि सब कुछ समाप्त होने वाला है और हमारा व्यवहार इस प्रकार से होता है कि यह वस्तु या यह व्यक्ति हमेशा रहेगा तो इससे हमेशा के लिए प्रेम या नफरत पैदा कर लो।

एक इंसान जो कि दूसरे व्यक्ति से बहुत नफरत करता है; इस बात कि पूरी सम्भावना है कि वह इंसान उसकी मौत के बाद वह वहीं नफरत नहीं जारी रख सकता है और इस लम्बे समय में भावनाओं में बहुत बार विचलन आता है। हम इस दुनिया को दस सिरों से सोचने और बीस हाथों से पाने की कोशिश करते हैं और इस प्रक्रिया में हम खुद के लिए बहुत मुश्किल बना लेते हैं, यह जानतें हुए कि जीवन का अंत शून्य से होना है। जो संसार को भ्रम समझकर उससे विरक्त होकर जंगलों को चला जाता है, यही संसार उसे कायर कहता है कि वह अपनी सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर सका। जबकि जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद, और जिम्मेदारियां कितनी भी पूरी कर लो, वह कभी समाप्त ही नहीं होंगी और अंत फिर से शून्य होना है। वारेन बफेट ने एक बार कहा था कि यह कहने के लिए पैसा ही सबकुछ नहीं होता है इससे पहले आपको ढ़ेर सारा पैसा कमा लेना चाहिए। जिसका अर्थ है कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर आप हो उसमें आनन्द महसूस करना आवश्यक है - यह जानकर कि सभी प्रकार का प्रयास एक भ्रम है और एक अंधी दौड़ लगा रहे हैं जिसका अंत श्मशान घाट से होगा। जीवन के कुछ दुख, कुछ पाश्चाताप जीवन के अंत के साथ ही समाप्त होते हैं। जीवन भर यह उन भयानक कांटों की तरह ह्रदय में चुभते रहते हैं और दर्द का वह हिस्सा बहुत असहनीय होता है जैसे शरीर को हर तरफ से चाकू से काट दिया गया हो और शरीर से प्राण बस निकल जाना चाहता है। मैं प्रत्येक क्षण उन दुखों के साथ मरता हूं और जीता हूं। उन गलतियों को करते समय जैसे बुद्धि शून्य हो जाती है और ऐसा कुछ हो जाता है जिससे जीवन बोझ और नरक के समान हो जाता है। मौत बहुत खुबसूरत होगी जो जीवन के भयानक दुखों से छुटकारा दिलाकर अपनी गोद में सुला लेती है। वह सुख मां की गोद से भी ज्यादा अच्छी होगी।

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