मैं और मेरे पिताजी।

जीवन के इस उच्चावचों पर चलते हुए इस बात का अहसास होता है कि कितना आवश्यक है एक सीधी रेखा का होना, जो बिल्कुल समतल हो। कभी कभी आभास होता है कि जीवन मरूस्थल सा हो गया है जिसका प्रत्येक पल रेगिस्तान के उस हरेक गर्म रेत के कणों के समान प्रतीत होता है। इसमें दूर दूर तक हरियाली नजर नहीं आती है, नजर आती है तो मरीचिका जहां दूर दूर तक रेत का ढेर नजर आता है, एक बियाबान और बंजर सा जीवन हो जाता है। जिसमें प्रसन्नता के पुष्प नहीं खिल रहे हैं, सुख व समृद्धि की कलियां नजर नहीं आती और दुख उन नुकीले कांटों की तरह लिपटा रहता है जिसके दंश से शरीर से रूधिर नहीं बल्कि अश्रुओं की एक नदी नयनों से प्रवाहित होती है जिसमें वह सम्पूर्ण जीवन को डूबा लेना चाहती हैं। अंधकार से भरे इस जीवन में प्रकाश का अवलोकन पिता की उपस्थिति से होता है। पापा का होना रेगिस्तान को हरा भरा मैदान बना देता है जहां सुख व प्रसन्नता के पौधे लहलहाते रहते हैं।

मैंने अपने पापा को कभी थका हुआ नहीं देखा और उनके भीतर वह सभी प्रकार की अच्छाइयां है जिससे मैं उनपर गर्व कर सकता हूं। उनका व्यक्तित्व मुझपर हावी रहता है और स्वयं को मैं उनके आंखों में कहीं खोजता रहता हूं। उनके भीतर एक उच्च स्तरीय आत्मा प्रेरणा है जो उन्हें कभी थकने नहीं देती और परिश्रम करना उनके जीवन का अटूट हिस्सा है। उन्होंने अपने भीतर हमेशा उच्च आचरणों को स्थापित किया और फिर हमारे भीतर मूल्य भरने का प्रयास किया जिसमें वे एक सीमा तक ज्यादा सफल हुए हैं। जब भी मैं उन्हें पसीने में तर देखता हूं, घंटों घंटों कलम चलाते देखता हूं तो मैं उनसे प्रेरित नहीं हो पाता हूं बल्कि स्वयं से सैकड़ों प्रकार के प्रश्न पूछता हूं। मुझे याद नहीं है कि पापा ने मुझ पर अंतिम बार हाथ कब उठाया था, उन्होंने हमेशा शब्दों का सहारा लेकर हमारे भीतर आचरण भरने का प्रयास किया। मैं जब भी उनके चेहरे को देखता हूं तो मेरी आत्मा मुझसे हजारों प्रकार के प्रश्न करती है और उनका जवाब मेरे पास नहीं होता है और फिर भावनाओं का एक ऐसा ज्वर पैदा होता है जो सम्पूर्ण शरीर को पीड़ा से भर देती हैं और वक्षस्थलों में एक असहनीय दर्द होती है। हम उस समय, एक पुतले की भांति हो जाते हैं जब हमारा सामना हमारी आत्मा से होती है तो ऐसा लगता है कि काटो तो खून नहीं निकले। परंतु उनपलो को बहुत ही धैर्य और संयम से पार करना चाहिए। हम खुद के प्रति ही नकरात्मक विचारों से भर जाते हैं लेकिन अच्छाई का एक प्रतिविम्ब पिता के चेहरे में देखकर स्वयं आगे बढ़ाना होता है।‌

पापा ने जीवन को उस उपवन की तरह बना दिया है जहां सैकड़ों प्रकार के पौधे अपनी कलियों और पुष्पों के साथ मुस्कुरा रहे हैं और उन्हें तेज धूप से बचाने के लिए वृक्षों का एक सहारा भी है। जड़ों में शीतल जल प्रवाहित हो रही है और फुव्वारे की तरह पत्तियों की गर्मी को शांत करती हैं। जीवन के इस उपवन को उन्होंने इतना मनोहर बनाया है कि उनमें दुख का एक पल भी नहीं है और अच्छी संसाधनों का एक भंडार यहां उपस्थित हैं। मैंने पूरा प्रयास किया है कि उनका जो विश्वास मेरे ऊपर है उस पर खरा उतरूं। अपने प्रत्येक कार्यों से उन्हें गौरव के वो पल दूं जो प्रत्येक पिता अपने पुत्र से आशा करता है, अभी तक इसमें एक बड़ी सफलता नहीं मिली है लेकिन मिलेगी ज़रूर।‌ पापा, हर वक्त मेरे बारे में सोचते रहते हैं और अपने प्रार्थनाओं में शामिल करते हैं। उनके त्याग और समर्पण को याद करने व उसके प्रति कृतज्ञ होने के लिए फादर्स डे के रूप में एक दिन काफी नहीं है, यह तो अनवरत अभिव्यक्ति है जो हमारे भीतर चलती है और मूल्यों का संवर्धन करती हैं। मुझे एक घटना याद आती है जब मैं स्नातक के प्रथम वर्ष में था तो एक दिन यूनिवर्सिटी में किसी ने मेरा मोबाइल चोरी कर लिया और जब मैंने मोबाइल निकालने के लिए जेब में हाथ डाला तो पैरों के नीचे से जमीन गायब हो गई। यह घटना उतनी बड़ी नहीं थी लेकिन इसका प्रभाव उस समय मेरे मस्तिष्क पर गहरा पड़ा और कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। मुझे इस बात का भय था कि पापा बहुत डांटेंगे। डांट तो खा लेते लेकिन वो मुझे कहीं गैरजिम्मेदार ना ठहरा दें, इसको कैसे सहेंगे। मैंने एक दोस्त का फोन लेकर पापा को फोन लगाया और उनके जो जवाब थे, वो आजतक मैं नहीं भूला हूं। उन्होंने कहा, "कोई बात नहीं, आप कल नया फोन ले लेना और तनिक भी चिंता ना करो" उनके इन शब्दों ने मुझे शीतलता का वह अनुभव दिया जो रेगिस्तान में किसी प्यासे को जल मिलकर होता है, मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था। पापा सब कुछ सम्हाल लेते हैं, वैसे इस उम्र में आकर पता चल रहा है कि सबकुछ सम्हालना कितना मुश्किल होता है‌।

हम सभी के पिता का जीवन हमारे लिए आदर्श होनी चाहिए और हमारे लिए उनका जो विश्वास और समर्पण है उसे हर स्थिति में सजीव रखना है और उनके परिश्रम को एक नया अवतार देना है जिससे वे गौरवान्वित महसूस करें। हम सब यहां अच्छे और बूरे दोनों है, हममें से कोई भी पूर्ण रुप से अच्छा या बूरा होना का दावा नहीं कर सकता है, दोनों तत्व हमारे भीतर हैं। पिता का जीवन हमें आदर्श ही नजर आनी चाहिए और उनसे हमेशा कुछ ना कुछ सीखने का प्रयास करते रहना चाहिए। पिता का प्यार उस नीम के कड़वे पत्ते की तरह होता है जिसका स्वाद तीखा जरूर होता हैं परंतु स्वास्थ्यवर्धक होता है। कभी पिता व पुत्र के बीच मूल्यों का एक द्वंद व टकराहट शुरू हो जाता है जो कि पीढ़ियों का एक अंतर मात्र हैं जिसे समझदारी से सुलझाया जा सकता है। ध्यान से ना सुनने पर हमारी स्थिति वैसी होती है जैसे कोई चोरी से आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़े और गिर पडने पर धूल झाड़ता हुआ उठ खड़ा हो कि कोई देख न ले । ओछे हथकंडे से जीतकर आप अपनी धोखेबाजियों की डींग मार सकते हैं; जीत में सबकुछ माफ हैं । हार की वस्तु तो पी जाने की वस्तु है।

फादर्स डे का अहमियत हमारे जीवन में इतना होना चाहिए कि हम अपने कर्मों द्वारा उन्हें गौरवान्वित महसूस करायें और जहां पीढ़ियों का संघर्ष नजर आए वहां समझदारी से इस पर काम करें और जीवन खुबसूरत बनता चला जाता है। ♥️

हैप्पी फादर्स डे....! 🌸❤️

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