PT 013/P2/2223
सूरज की वे किरणें, जिनमें अत्यधिक ताप था, जो जमीन पर उगे उन हजारों पेड़-पौधों को झुलसा दे रही थीं, उन किरणों का प्रभाव मुझ पर शून्य था। मैंने रात के घने अंधेरे में, उस शांत पत्ते को सुनने का प्रयास किया है जो अपने साथ बहुत सारे रहस्यों को छुपाएं है। मैं आज तक उनके दर्द को समझ नहीं पाया हूं, जैसे कोई अचानक आता है और इस शांत सरोवर के जल में एक बड़ा पत्थर उठाकर छपाक से फेंक देता है और वह एक हलचल पैदा कर देता है, वह पत्ती जो कुछ मेरे साथ सहज महसूस करने लगी थी और अपनी व्यथा सुनाने वाली थीं - पत्थर के इस चोट से मैं भी बौखला जाता हूं। मैंने सागर की लहरों को पढ़ने का असफल प्रयास किया है और मैं जितना कुछ भी जानता जाता, उतना ही ऐसा महसूस होता जैसे मैं बहुत कम जान रहा हूं। आखिर ये लहरें थकती क्यों नहीं है? क्यों सुबह-शाम, दिन-रात, सैकड़ों और करोड़ों वर्षों से ये लगातार, बिना थके उठ रही है, गिर रही हैं और सागर की गर्त में समा जा रहीं हैं! क्या इसके लिए केवल सूर्य और चंद्रमा की आकर्षण शक्तियां ही जिम्मेदार है? ऐसा तो नहीं लगता!
जो युद्ध स्वयं के खिलाफ होती है, वह सबसे भयानक और विध्वंसक होती है। यह प्रथम, द्वितीय युद्ध या संसार के किसी भी बड़े युद्ध से अधिक क्षतिग्रस्त करने वाली होती है। यह हमारे भीतर निर्माण और प्रलय के बीच का द्वंद्व है जिसमें हम एक तरफ जीवन को बहुत अधिक परिष्कृत, सफल और लोकप्रिय बनाना चाहते हैं तो दूसरी तरफ भीतर कुछ ऐसा होता है जो हमारे निर्माण में बाधक बनता है। जो हमारा ध्यान उस महान लक्ष्य से भटकाता है जिसे पाने की कामना हर कोई करता है। हमें केवल और केवल अनुशासित बनने का प्रयास करना चाहिए, शांत, मौन और ईमानदार। जैसे महासागर शांत और सहनशील है, वह हमारे सभी गलतियों को स्वयं में समा ले रही है और आसमान एक विशाल स्थिति जैसे महासागर को ओढ़ कर बैठी है। लेकिन हम किस सीमा तक परोपकारी हो सकते हैं और किस सीमा तक स्वार्थी हो सकते हैं! सागर पूरी तरीके से सहनशील नहीं है - वह भी सूनामी, चक्रवात, अल-नीनो जैसे अपने हथियारों से मनुष्यों और मनुष्यों की बस्तियों को नष्ट कर देती है । उसने भी प्रत्येक चीजों के लिए सीमा निर्धारित कर रखा हैं।
हिमालय के जिस भाग पर, वह संजीवनी नामक पौधा उगा होगा, जो मरते हुए व्यक्ति के प्राणों की रक्षा कर लेता है; क्या वह स्वयं पर गर्व और अहंकार नहीं करता होगा? वह सभी पौधों में महान हो गया और जब वह सभी पौधों को देखता होगा, उतनी ऊंचाई पर बैठकर; सम्भ्रांत, आभिजात्य और विशिष्ट होने के मानसिक सुख का उपभोग करता होगा। लेकिन मैं यह जानना चाहता हूं कि हमारे लिए कौन से पौधे महत्वपूर्ण है? वे पौधे जो हमारे लिए अनाज, फल, मसाले और सब्जियों का उत्पादन करते हैं जो हमारी रक्षा रोज भूख से करती है और जो हमें रोज जीवन के सुखद अनुभव देती है। आखिर क्या कोई व्यक्ति भोजन के बिना एक लम्बे समय तक जीवित रह सकता है? अगर, संजीवनी किसी मरते व्यक्ति को जीवन देती है, उसके मरे हुए शरीर में प्राण भरती है तो उसे जीवित रहने के लिए उन पौधों की हमेशा जरुरत होगी जो भोजन देते हैं। संजीवनी पौधा हमारे लिए कभी भी आवश्यक नहीं हो सकता; और फिर उस मौत से क्या भागना, जो बिल्कुल अटल है और प्रत्येक को एक दिन मौत की आगोश में हमेशा के लिए सो जाना है।
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